आकाश में आनंद उठाएं उल्का वर्षा का । Enjoy Eta Aquarids Meteor Shower on 06-07 May 2020.

06-07 मई 2020 की रात लीजिए उल्का वर्षा के नजारे का आनंद ।


जी हां सही सुना आपने । दिनांक 07

मई को सूर्योदय से लगभग 2 घंटे पहले से हमे इटा एक्वारिड्स उल्का वर्षा के नजारे देखने को मिलेंगे । मई माह की सबसे ज्यादा मनमोहक खगोलीय घटना के लिए खगोलप्रेमी कई दिनों से इसका इंतजार कर रहे थे । यूं तो अभी लोगो ने लिरिड्स उल्का वर्षा को 22 अप्रैल की रात्रि में देखा था । मगर 7 तारीख की भोर में यह वाली उल्का वर्षा अपने अधिकतम पर होगी ।



इसमें उल्का वर्षा में प्रति घंटे 35 से 60 उल्का दिख सकती है । वैसे इसका रिकॉर्ड एक घंटे में 80से 90 उल्का दिखाई देने का है । रात्रि में करीब 2.00 बजे ईटा एक्वाराइड्स उल्का वर्षा पूर्व दिशा के क्षितिज से ऊपर की और उगना शुरू करेगी मगर इस उल्का वर्षा को देखने का सर्वश्रेष्ठ समय रात 03.00 बजे से 4.30 बजे तक है । पूर्व दिशा में क्षितिज से काफी ऊपर की ओर से कुंभ तारामंडल या एक्वारियस तारा समूह के सातवें सबसे ज्यादा चमकदार तारे एटा एक्वारिड्सा के पास से तारे टूटते हुए दिखेंगे । अधिकतम 35 से 80 उल्काएं आपके रात्रि आकाश के हिसाब से दिख सकेंगी । यदि आप ऐसी जगह है जहां रात्रि आकाश बहुत ज्यादा साफ और प्रकाश प्रदूषण से रहित है वहां से ज्यादा और इसके विपरीत जहां प्रकाश प्रदूषण ज्यादा है या रात्रि आकाश साफ नहीं है वहां से कम उल्काएं दिखाई देंगी । सुबह के 4.30 बजे ये उल्का वर्षा हमे अपने ठीक सर के ऊपर के करीब यानि nearly हेड ऑन पर दिखाई देंगी । इन्हे पहचानने का सबसे भरोसेमंद तारा है एटा एक्वारिडस तारा । आपको यह भी जान कर आश्चर्य होगा कि कुंभ तारामंडल से हमे 4 उल्का वर्षा देखने को मिल सकती है । मार्च एक्वारीडस, एटा एक्वाराइड, डेल्टा एक्वारिड, आयोटा एक्वारिडास । लिरीड्स उल्का वर्षा में उल्काएं लगभग 66 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से पृथ्वी की ओर गिरती है । चूंकि ये उल्का वर्षा हमे एक्वारिडास तारा समूह के एटा तारे के आस पास से आते हुए दिखते है अतः इसे एटा एक्वारिडास उल्का वर्षा कहते है ।


अन्य उल्का वर्षा की तरह ये उल्का वर्षा भी एक धूमकेतु , कामेट 1P ya Halley के द्वारा पृथ्वी के पथ पर छोड़े गए मलबे में से पृथ्वी के गुजरने पर दिखाई देती है । इसका मतलब है कि इस उल्का वर्षा की उत्पत्ति का कारण धूमकेतु halley है , इसके पथ से पृथ्वी अक्टूबर में भी गुजरती है जिससे orionids उल्का वर्षा दिखाई देती है । Halley comet ab hame San 2061 me dikhayi padega. धूमकेतु के मलबे में एक रेत के कण से के कर काफी बड़े टुकड़े हो सकते है ज्योहि पृथ्वी इनसे हो कर गुजरती है कुछ मलबा पृथ्वी की और गिरना शुरू कर देता है । और पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करते ही गरम हो कर रात्रि आकाश में चमकते हुए से दिखते है । और ख़तम हो जाते है जिससे इन्हे टूटते तारे भी कहा जाता है । मगर यदि पिंड का आकार इतना बड़ा हो की पृथ्वी की तरफ गिरते समय वो पूरा ना जल पाए तो इन्हे उल्का पिंड कहते है जो कि पृथ्वी पर कई बड़ी झीलों के निर्माण का कारण बनते है जैसे भारत की चिल्का झील ।


जिस प्रकार से पृथ्वी सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती है उसी प्रकार से धूम केतु भी पृथ्वी के चारो ओर एक कक्षा में चक्कर लगाते है । जिसका आकार यानि परिक्रमा पथ ऐक अति परवल याकार होता है


और सूर्य उनके एक फोकस पर होता है । ज्योंहि धूमकेतु सूर्य के करीब आता है वो सूर्य की गर्मी से टूटने लगता है और अपने पीछे बर्फ एवम् चट्टानी धूल छोड़ते चले जाते है ।


इस मलबे से हो कर जब जब पृथ्वी गुजरती है तब तब हमे वो उल्का वर्षा नजर आती है । जैसे इस बार एटा एक्वारिदास उल्का वर्षा धूमकेतु Halley के मलबे की वजह से दिखाई देगी ।


जब कई उल्काएं एक साथ पृथ्वी की तरफ गिरती हुई दिखाई दे तो इस घटना को उल्का पात ना कह कर उल्का वर्षा का नाम दिया जाता है ।



पिण्ड तीव्र गति से अन्तरिक्ष में घूमते रहते हैं। उल्का पिण्ड जब पृथ्वी के वायुमण्डल में प्रवेश करते हैं तो घर्षण के कारण वह जलकर चमकने लगते हैं। जलने के पश्चात यह राख में बदल कर धरती पर बिखर जाते हैं। सामान्यतः इनको शुटिंग स्टार (Shooting Stars) कहते हैं ।


अन्तरिक्ष से कोई भी वस्तु पृथ्वी के धरातल पर गिरती है तो उल्का पिण्ड (Meteorite) कहलाती है। ये उल्का पिण्ड चट्‌टानों के टुकड़े, राख, निकिल-लोहे आदि के बने होते हैं।


विश्व में उल्का पिण्ड के गिरने से अरिजोना राज्य में एक बहुत बड़ा क्रेटर बन गया था। कहा जाता है कि, 1300 मीटर गहरा यह क्रेटर लगभग दस हजार वर्ष पूर्व बना था।



अधिकतर का आकार बहुत ही छोटा (रेत के कण से भी छोटा) होता है इसलिए वह सतह तक पहुँचने से बहुत पहले ही ध्वस्त हो जाते हैं। अधिक घनी उल्का वर्षा को उल्का बौछार (meteor outburst) या उल्का तूफ़ान (meteor storm) कहते हैं और इनमें एक घंटे में 1000 से अधिक उल्का गिर सकते हैं।


ये उल्काएं जीवन चक्र बनाए रखने में योगदान करती है और इनकी रखवाए हमे अंतरिक्ष के खनिज प्राप्त होते है । यदि उल्का पिंड पृथ्वी पर गिरता है तो वैज्ञानिक उसके अध्ययन से पृथ्वी से बाहर जीवन की संभावनाएं तलाशते है । क्योंकी कई थियोरीज में ये माना जाता है कि धूमकेतु से ही पृथ्वी पर जीवन प्रारंभ हुआ ।

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