थंडर चन्द्र ग्रहण से चूके खगोल प्रेमियों को करना होगा माह नवंबर का इंतज़ार

Updated: Jul 17


थंडर पेनंब्रल चंद्रग्रहण (Thunder Penumbral Lunar Eclipse)


जुलाई माह के पूर्णिमा को बक मून (Buck Moon), थंडर मून (Thunder Moon), वर्ट मून (Wort Moon), हेय मून (Hay Moon) कहा जाता है । इस कारण इस माह की 5 तारीख को दिन में 08:37:23 से पनंब्रल चन्द्र ग्रहण का आरंभ होगा जो कि अगले 2 घंटे 45 मिनट तक यानि 5 जुलाई को 11:22:23 तक चलता रहेगा ।


इस प्रकार ये उप छायी चन्द्र ग्रहण कुल 02 घंटे 45 मिनट तक चलता रहेगा ।




किन्तु यह चन्द्र ग्रहण की घटना दिन के समय घटित होगी इससे ये घटना भारत वर्ष में नहीं देखी जा सकेगी ।

लिहाजा भारत वर्ष में थंडर मून इक्लिप्स की घटना खगोल प्रेमी नहीं देख पाएंगे ।



भारत वर्ष में चन्द्रमा की पूर्णिमा (Full Moon) सुबह 10:14 मिनट पर है । मगर चन्द्रमा पृथ्वी और सूर्य एक सीधी रेखा में उससे पूर्व ही आ जाएंगे । यही कारण है कि चन्द्रमा का उपच्छाई चन्द्र ग्रहण की घटना घटित हो रही है ।



इस उप छाई चन्द्र ग्रहण का अधिकतम अवस्था (Maximum Phase) दिन में 10: 01:11 पर होगा ।



चन्द्र ग्रहण की स्तिथि तब बनती है जब चन्द्रमा, पृथ्वी और सूर्य एक सीधी रेखा में आ जाता है । चूंकि चन्द्रमा का परिक्रमा पथ पृथ्वी के सापेक्ष 5° का झुकाव लिए हुए है, अतः हमें हर पूर्णिमा को चन्द्र ग्रहण देखने को नहीं मिलता ।



सरल शब्दों में अगर कहे तो चन्द्रमा, पृथ्वी एवम् सूर्य जब एक ही तल में और ऐक सीधी रेखा में हो तो पृथ्वी की छाया चन्द्रमा पर पड़ती है । जिससे इस दिन पूर्ण चन्द्र ग्रहण होता है ।



मगर चूंकि पृथ्वी की छाया को दो हिस्सो में विभाजित किया जा सकता है ।


१. प्राच्छाया (Umbra) २. उप छाया (Penumbra)


प्रच्छाया के क्षेत्र में सूर्य का विकिरण पूर्ण रूप से अवरुद्ध हो जाता है । उप छाया के क्षेत्र में सूर्य का प्रकाश पूर्ण रूप से अवरुद्ध नहीं हो पाता ।



यदि प्राच्छया अगर चन्द्रमा पर पड़े तो पूर्ण या आंशिक चंद्रग्रहण (Total or Partial Lunar Eclipse) और उप छाया अगर चन्द्रमा पर पड़े तो उप छाई चन्द्र ग्रहण (penumbral Lunar Eclipse) कहलाता है ।


दक्षिण पूर्व यूरोप, अफ्रीका, साउथ अमेरिका, प्रशांत महासागर, अटलांटिक महासागर, अंटार्टिका और अमेरिका के क्षेत्रों से ये ग्रहण देखा जा सकता है ।


चूंकि माह जुलाई की पूर्णिमा को थंडर मून भी कहा जाता है अतः ये चन्द्र ग्रहण थंडर चंद्रग्रहण या बक चन्द्र ग्रहण कहलाएगा ।



यदि हम एक दिन पूर्व में के चन्द्रमा का भी अवलोकन करते है तो पेनंब्राल चन्द्र ग्रहण को आसानी से पहचान सकेंगे ।


वास्तव में उप छाई चंद्रग्रहण को नंगी आंखों देखने पर चन्द्र ग्रहण का आरंभ एवम् अंत को नहीं समझा जा सकता है । किन्तु जब चन्द्रमा पूर्ण रूप से पृथ्वी की उप छाया में आ जाएगा तब हम चन्द्रमा के प्रकाश में आए हुए अंतर को आसानी से देख पाते है ।


चूंकि भारत में इस चंद्रग्रहण को देखने का कोई अवसर नहीं है इसीलिए भारत के खगोल प्रेमी 30 नवंबर 2020 के चन्द्र ग्रहण का इंतजार कर रहे है । ये चन्द्र ग्रहण बीवर लुनार इकलिप्स या ओक मून इकलीप्स कहलाएगा ।

वर्ष 2009 को दोबारा से रिपीट कर रहा है वर्ष 2020 । क्योंकि वर्ष 2009 में चन्द्र ग्रहण, सूर्य ग्रहण और फिर चन्द्र ग्रहण पड़ा था जोकि ऐक महीने के समय में तीन ग्रहण थे ।वर्ष 2009 में भी एक माह की अवधि में तीन ग्रहण की घटना घटित हुई थी ।
जो कि क्रमशः प्रथम चन्द्रग्रहण दिनांक 07.07.2009, द्वितीय पूर्ण/आंशिक सूर्यग्रहण दिनांक 22.07.2009 एव ं तृतीय चन्द्रगहण दिनांक 06.08.2009 को थे। इस प्रकार एक माह की अवधि में तीन ग्रहण की घटना लगभग 11 वर्ष पश्चात घटित हो रही है। जिसमे प्रथम चन्द्र ग्रहण 5-6 जून 2020 , सूर्य ग्रहण 21 जून 2020 और पुनः चन्द्र ग्रहण 05 जुलाई 2020 को होगा ।


चन्द्रमा पर पृथ्वी की छाया की गति लगभग 1 किलोमीटर प्रति सेकंड होती है जिसके कारण पूर्ण चंद्रग्रहण लगभग 107 मिनट तक रह सकता है ।


श्वेता श्रीवास्तव,

साइंस कम्युनिकेटर,

प्रेसिडेंट एवम् कोऑर्डिनेटर, वूमेन लेड साइंस ।

स्काई फाउंडेशन ।



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