नमस्ते एस्टेरॉयड, 29 अप्रैल 2020

आज के दिन को के कर बहुत दिन से चर्चाएं तैर रही थीं , कि एस्टेरॉयड आएगा, मेटियोराइट आएगा , पृथ्वी ख़तम होगी, आधी आबादी ख़तम, ये ख़तम, वो ख़तम, अला - बला , अगड़म - झगड़म । माउन्ट एवरेस्ट के साइज वाले एस्टेरॉयड का पृथ्वी के पास से गुजरना, वैज्ञानिकों के साथ साथ , आम आदमी के कौतूहल का विषय बन गया था । ये एस्टेरॉयड काफी बड़ा और काफी द्रुतगामी गति से आगे बढ़ रहा था ।


इस एस्टेरॉयड का नाम था , 1998 ओ. आर. 2 । भारतीय समयानुसार, यह पिंड पृथ्वी के करीब से दोपहर लगभग 3.30 बजे गुजरना था । आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि यदि कोई भी पिंड चाहे वो रेत के बराबर हो या पहाड़ के बराबर , यदि वो पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता तो वो वायुमंडल के घर्षण के कारण जलना शुरू हो जाता । वायुमंडल को तो छोड़िए जनाब यदि सही में ये आज टकराने वाला होता तो आसमान में ये चंद्रमा के बाद या चन्द्रमा के बराबर चमकदार पिंड होता जो कई दिन पूर्व से ही देखा जा सकता । ऐसा कुछ भी नहीं था, सिर्फ लॉक डॉउन में बंद लोगो के में का डर और वहम, लोग आसमान कि तरफ ज्यादा आकर्षित है ।


हां लेकिन यह जरूर है कि लगभग 2 किलोमीटर चौड़े व्यास वाले इस एस्टेरॉयड की महत्वपूर्ण गणनाएं एवं स्टडी के लिए खगोल वैज्ञानिकों और रिसर्चर्स को एक अच्छा मौका जरूर दिया है ।


अरे अरे - रुकिए जनाब एक बहुत रोचक बात बताता हूं । धरती और चंद्रमा के बीच की दूरी है लगभग 384000 (तीन लाख चौरासी हज़ार किलोमीटर)

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