नासा एस्ट्रॉयड सर्च कैंपेन में लखनऊ के स्वप्निल रस्तोगी और उनकी टीम को नासा से प्रमाण पत्र मिला ।

IASC (इंटरनेशनल एस्ट्रॉनॉमिकल सर्च कोलेबोरेशन), अन्तर्गत नासा स्पेस एजेंसी (NASA) , के तत्वाधान में विपनेट (विज्ञान प्रसार, भारत सरकार) के सहयोग से हाल ही में सम्पन्न हुए अखिल भारतीय एस्टेरॉयड खोज कार्यक्रम: इग्नाइटेड माइण्ड्स- SKYAAC सप्तर्षि इण्डिया ऐस्टेरोइड सर्च कैंपेन में चयनित होने वाले उत्तर प्रदेश के विज्ञान संचारकों व विज्ञान शिक्षकों ने वैज्ञानिक खोज में एक नया प्रतिमान स्थापित किया है।




विज्ञान प्रसार के विपनेट क्लबों की अखिल भारतीय स्तर की विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों की 10 टीमों ने इग्नाइटेड माइण्ड्स- SKYAAC सप्तर्षि इण्डिया ऐस्टेरोइड सर्च कैंपेन में प्रतिभागिता की, जिसमें लखनऊ से विज्ञान संचारक श्री स्वप्निल रस्तोगी (प्रेसिडेन्ट, SKYAAC स्काई एमेच्योर एस्ट्रोनॉमर्स विपनेट क्लब VP-UP0149) के नेतृत्व में श्री अर्पण गुप्ता, श्री अनुराग तिवारी, श्री सुभान राज, श्री क्षितिज श्रीवास्तव, श्री रोहित सिंह, कु0 साक्षी द्विवेदी एवम् डॉक्टर प्रदीप सोलंकी ने अस्ट्रोइड सर्च कैंपेन की टीमों के सदस्यों के तौर पर उत्तर प्रदेश राज्य का प्रतिनिधित्व किया।



कार्यक्रम का प्रारूप: IASC (इंटरनेशनल एस्ट्रॉनॉमिकल सर्च कोलैबोरेशन) का मुख्य कार्य टेलीस्कोप के माध्यम अन्तरिक्ष से उच्च क्वालिटी का एस्ट्रॉनॉमिकल डाटा सिटिज़न साइण्टिस्टों को उपलब्ध कराना होता है जिसकी सहायता से अन्तरिक्ष के ऑब्जेक्ट को ऑब्ज़र्व करते हैं। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत Pan-STARRS ऑब्ज़रवेटरी से प्राप्त विशिष्ट खगोलीय छायाचित्रों का सॉफ्टवेयर विशेष पर प्रशिक्षित लोगों द्वारा एनालिसिस कर एस्टेरॉयड अर्थात् छुद्रगहों की मौजूदगी का पता लगाकर उनकी खोज की जाती है।


ट्रेनिंग: इस कार्य के लिए चयनित प्रतिभागियों ने विज्ञान प्रसार, भारत सरकार के वैज्ञानिक ’एफ’ एवं डिवीज़न हेड खगोलशास्त्र व विपनेट डॉ0 अरविन्द रानाडे एवं कैंपेन के राष्ट्रीय कन्वीनर श्री अमृतांशु वाजपेयी के मार्गदर्शन में एवं श्री सुमित कुमार श्रीवास्तव, वैज्ञानिक अधिकारी, इन्दिरा गांधी नक्षत्रशाला, लखनऊ तथा SKYAAC विपनेट क्लब VP-UP0149 के सहयोग से ऑनलाइन 45 दिन का एस्टेरॉयड हंटिंग का प्रशिक्षण प्राप्त किया। श्री सुमित कुमार श्रीवास्तव लखनऊ में खगोल विज्ञान के प्रचार प्रसार में पिछले 13 सालो से कार्य कर रहे है ।


श्री अमृतांशु वाजपेयी एवं श्री सुमित श्रीवास्तव के नाम पर भी पहले से 50 से अधिक प्रीलिमिनरी एस्टेरोयड डिस्कवरीज़ दर्ज हैं।


खोजों की जानकारी: सम्पूर्ण कैंपेन की 10 टीमों के सिटिज़न साइण्टिस्टों की टीमों ने 81 छुद्रग्रहों की प्रीलिमिनरी खोज की। उक्त प्रतिभागियों की दो टीमों ने सामूहिक एनालिसिस के आधार पर प्रिलिमिनरी स्टेज पर क्रमशः 12, 07 छुदग्रहों की प्रिलिमिनरी खोज की है।



लखनऊ के श्री स्वप्निल रस्तोगी के व्यक्तिगत खाते में भी एक प्रिलिमिनरी खोज आई है, वैज्ञानिक नामावली के अनुसार जिनको कैम्पेन रिर्काड्स में P11803B नामकरण दिया गया है तथा टीम नामावली रिर्काड्स में SKY2003 नाम रखा गया है। और इस खोज के लिए स्वप्निल रस्तोगी को नासा की तरफ से सर्टिफिकेट भी प्रदान किया गया है जो कि गौरव की बात है ।




लखनऊ के ही श्री क्षितिज श्रीवास्तव, श्री रोहित सिंह, कु0 साक्षी द्विवेदी, अर्पण गुप्ता, सुभान राज तथा टीम में शामिल डॉक्टर प्रदीप सोलंकी को भी एक-एक प्रिलिमिनरी खोज का व्यक्तिगत श्रेय प्राप्त हुआ है । जिसके लिए सभी सदस्यों को नासा की तरफ से सर्टिफिकेट ऑफ़ मेरिट प्रदान किया गया है । यह लखनऊ के लिए गौरव की बात है कि यहां के युवाओं में भी सिटिज़न साइंटिस्ट आदि प्रोग्रामो में हिस्सा लेने की उत्सुकता जाग्रत हुई है ।


प्रोग्राम का महत्व: अन्तरिक्ष में मौजूद उल्का पिंड गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण कभी-कभी हमारी धरती की कक्षा के इतने निकट आ जाते हैं जो कभी भी पृथ्वी से टकराकर महाविनाश का कारण बन सकते हैं इसलिए इन पर पैनी नज़र रखना बहुत जरूरी होता है। लाखों वर्ष पूर्व एक बहुत बड़ा आकाशीय पिण्ड मेक्सिको क्षेत्र में पृथ्वी से टकराया था जिसके कारण क्षेत्र के पूरे डायनासोर विलुप्त हो गए थे। साथ ही साथ सौरमण्डल की उत्पत्ति से लेकर अब तक की समय यात्रा के जीवन्त साक्ष्यों के रूप में छुद्रग्रह, उल्कापिण्ड, धूमकेतु आदि खगोलीय पिण्ड वैज्ञानिक शोधों में भी अग्रिणी स्थान रखते हैं। अतः अन्तरिक्ष में लाखों की संख्या में मौजूद पिण्डों में से कौन-सा पिंड कहाँ है, उस पर नज़र रखने के लिए नासा द्वारा यह सिटिज़न साइंस का प्रोग्राम हर महीने चलाया जाता है।



प्रतिभागी देश: निवर्तमान में भारत सहित अमेरिका, ऑस्ट्रिया, बांग्लादेश, बोलीविया, ब्राज़ील, बल्गारिया, कैनेरी द्वीप समूह, कोलंबिया, चीन, जर्मनी, ईरान, इटली, नेपाल, पनामा, पोलैण्ड, पुर्तगाल, सर्बिया, श्रीलंका, यूनाइटेड किंग्डम, उराग्वे, वेनेज़ुएला आदि देशों के विज्ञान छात्र व शिक्षक समय-समय पर निरंतर प्रतिभागिता देते रहते हैं।

सिटीजन साइंटिस्ट के तौर पर कोरोनाकाल में में भी पृथ्वी के सुरक्षित भविष्य हेतु उल्कापिंडो के खतरों से बचाने में होने वाले शोध में इनकी भूमिका महती एवं प्रशंसनीय है।



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