International Space Station (ISS), अन्तर्राष्ट्रीय स्‍पेस स्‍टेशन

International Space Station (ISS) above Lucknow in April 2020.


दिनांक 10 अप्रैल 2020 को लखनऊ के रात्रि आकाश में "आई. एस.एस." (ISS) पश्चिम तथा दक्षिण - पश्चिम दिशा के बीच में से शाम 7:29 को दिखाई देना शुरू हुआ । तथा अगले चार मिनट तक रात्रि आकाश में गमन करता हुआ नजर आया । जिसे लखनऊ वासियों ने खूब ध्यान से देखा और अपनी फ़ैमिली की भी दिखाया । लखनऊ में 10 अप्रैल 2020 के रात्रि आकाश में "आई. एस.एस." (ISS) की महत्तम ऊंचाई क्षितिज से 31° थी ।
लखनऊ में खगोल प्रेमी "आई. एस.एस." (ISS) का अगला अवलोकन दिनांक 22 अप्रैल 2020 को भोर में 04:52 पर तथा दिनांक 23 अप्रैल 2020 को भोर में 04:05 पर तीन - तीन मिनट के लिए कर सकेंगे । 22 अप्रैल को "आई. एस.एस." (ISS) दक्षिण तथा दक्षिण - पश्चिम के बीच से दिखाई देना शुरू होगा जो पूर्व तथा दक्षिण पूर्व दिशा के बीच में, की ओर जाते हुए विलुप्त हो जाएगा । इस दिन अप्रैल में सबसे ज्यादा ऊचाई 33° पर होगा । तथा 23 अप्रैल 2020 को दक्षिण तथा दक्षिण - पश्चिम के बीच में से दिखाई देना शुरू करेगा तथा ठीक 3 मिनट बाद पूर्व तथा दक्षिण - पूर्व दिशा के बीच में, की ओर जाते हुए विलुप्त हो जाएगा । इस दिन की महत्तम ऊंचाई क्षितिज से 16° रहेगी ।

ISS Flyby above Lucknow on 9th April 2020


International Space Station


अन्तर्राष्ट्रीय स्‍पेस स्‍टेशन (International Space Station) एक ऐसा अंतरिक्ष यान (Space craft) है। जिसमे अंतरिक्ष यात्री (Astronaut) रहकर कई तरह के प्रयोग करते हैं। यह लंबे समय तक अंतरिक्ष (Space) में रह सकता है। अन्तर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से दूसरा अंतरिक्ष यान भी जुड़ सकता है। इसे 1998 में अंतरिक्ष में स्‍थापित करना शुरू किया गया था।



image Courtasy : www.nasa.gov/

"आई. एस.एस." (ISS) पृथ्‍वी की निचली कक्षा में रहकर लगभग 350 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी का चक्कर (Revolution) लगा रहा है । इसे नंगी आंखों (Naked Eyes) से भी देखा जा सकता है। इस ISS में यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) , जापान एयरो स्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA), नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एजेंसी (NASA), कनाडियन स्पेस एजेंसी (CSA), रोस्कॉस्मोस (RUSSIAN FEDERAL SPACE AGENCY), एक साथ मिल कर अंतरिक्ष स्‍टेशन से काम करते है ।



The "aurora australis" is pictured near the southern-most point of the International Space Station's orbital trek above the Indian Ocean.

image courtesy : www.nasa.gov/ इस समय पृथ्वी के चारो ओर "आई. एस.एस." (ISS) के अतिरिक्त चीन का "तियांनगोंग - 2" (Tiangong-2) ही स्पेस स्टेशन के रूप में कार्य कर रहा है । आईएसएस पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित है। इससे पहले रूस का अंतरिक्ष स्टेशन 'मीर' (Mir) पृथ्वी की परिक्रमा करता था, लेकिन सुरक्षा के कारणों और बेहिसाब खर्चों के कारण इसे रूस (Russia) द्वारा प्रशांत महासागर में गिरा दिया गया था ।



tiangong-1

courtasy : boygeniusreport.files.wordpress.com/


Tiangong-2

courtasy :www.3.bp.blogspot.com



Mir Space Station

image courtasy : www.upload.wikimedia.org/

"आई. एस.एस." (ISS) के पृथ्वी के चक्कर लगाने के समय इसकी पृथ्वी से दूरी पेरीगी (Perigee) की स्थिति में 343 किलोमीटर और अपोगी (Apogee) की स्तिथि में 351 किलोमीटर होती है । यह पृथ्वी की परिक्रमा लगभग 91 मिनट में पूरी कर लेता है ।


"आई. एस.एस." (ISS) की लंबाई 239.4 फीट एवम् चौड़ाई 357.5 फीट है । इसमें लगभग 12500 वर्ग फीट की जगह रहने योग्य है, जो कि एक फुटबाल के मैदान के बराबर जगह है । इसका निर्माण 1998 से शुरू हो कर 2011 तक कई चरणों में किया गया है ।




2 नवंबर 2000 से "आई. एस.एस." (ISS) को लगातार प्रयोग में लाया जा रहा है। वहां हमेशा कोई ना कोई अंतरिक्ष यात्री बना रहता है । इसे बनाने में लगभग 15 देशों ने सहयोग किया है ।


यदि किसी रात्रि में हमे "आई. एस.एस." (ISS) दिखाई देता है तो वो रात्रि आकाश में तीसरा सबसे ज्यादा चमकदार तारे जैसा (Third Brightest Object in moonless night sky) नजर आता है । इसे नंगी आंखो (Naked Eyes) से देखा जा सकता है । नंगी आंखो से देखने पर यह एक तेज रफ़्तार हवाई जहाज (Fast Moving Airplane) जैसा नजर आता है । जिसकी रफ़्तार एक सामान्य हवाई जहाज की तुलना में लगभग 28 गुना (Twenty Eight Times) होती है । एक हवाई जहाज की रफ्तार लगभग 950-965 किलोमीटर प्रति घंटा (950-965 km/hour) होती है , जबकि "आई. एस.एस." (ISS) की रफ्तार लगभग 28000 किलोमीटर प्रति घंटा (28000 km/hour) या 5 मील प्रति सेकंड (5 Mile/second) होती है । यह एयरोप्लेन की तरह लाइट फ़्लैश (Flashing of light) नहीं करता, ना ही अपनी दिशा बदलता है ।



image courtasy :- https://spotthestation.nasa.gov/


अपनी इसी तेज गति के कारण "आई. एस.एस." (ISS) पर रहने वाले अंतरिक्ष यात्रियों (astronauts) को एक दिन में 16 सूर्योदय (sixteen sunrises) और 16 सूर्यास्त (sixteen sunsets) नजर आते है । स्पेस स्टेशन "आई. एस.एस." (ISS) ठीक अपने चन्द्रमा (The Moon) की तरह सूर्य (The Sun) के प्रकाश से प्रकाशित होता है, इसीलिए यदि रात्रि आकाश में चन्द्रमा है भी, तो भी आपको "आई. एस.एस." (ISS) आसानी से नजर आएगा ।



ISS Flyby over Lucknow- Kapur Bipass Road


सूर्य की रोशनी "आई. एस.एस." (ISS) के बड़े बड़े सोलर पैनल्स (the acre of solar panels) से परावर्तित होती है। जिससे "आई. एस.एस." (ISS) रात्रि आकाश में एक चलते हुए प्रकाशित तारे जैसा नजर आता है। यदि किसी जगह से "आई. एस.एस." (ISS) स्पेस स्टेशन नजर आ रहा है तो इसके 80 किलोमीटर के त्रिज्या वाले वृत्ताकार क्षेत्र में ठीक उसी समय सबको नजर आएगा । यदि "आई. एस.एस." (ISS) स्पेस स्टेशन क्षितिज से लगभग 40 डिग्री ऊपर होगा तभी नजर आएगा । इससे कम ऊंचाई होते ही स्पेस स्टेशन विलुप्त हो जाएगा ।



ISS solar Panels


अब तक 19 देशों के 239 अंतरिक्ष यात्रियों ने "आई. एस.एस." (ISS) की यात्रा की है । पैगी व्हाइटसन (Peggy Whiteson) ने अब तक "आई. एस.एस." (ISS) पर 665 दिन काम करते हुए रहने का रिकॉर्ड बनाया है जिसे अभी तक कोई तोड़ नहीं पाया है । इस समय "आई. एस.एस." (ISS) पर जेसिका मेयर (Jessica Meir), ओलेग स्करीपोचका (Oleg Skripochka), एंड्र्यू मॉर्गन (Andrew Morgan), क्रिस कैसिडी (Chris Cassidy), अनातोली इवांशिन (Anatoly Ivanishin), इवान वांगर (Ivan Vagner) अंतरिक्ष यात्री (Astronaut) पृथ्वी के चक्कर लगा रहे है ।



Peggy Whiteson

image courtasy : http://spaceflight101.com/iss-expedition-50

आपके शहर के ऊपर से कब आई एस एस गुजरेगा और दिखेगा इसकी जानकारी के लिए आपको नासा की वेबसाइट http://spotthestation.nasa.gov पर अपने आप को रजिस्टर करना होगा ।



image courtasy: spotthestation.gov/

इसमें 6 बेडरूम, दो बाथरूम, एक जिम, एक 360 डिग्री की व्यू हेतु विंडो लगी हुई है । एक बार में छह स्पेसशिप इस स्टेशन से जुड़ सकते है । अंतरिक्ष यात्रियों ने अब तक 221 बार स्पेस वॉक (Space Walk) की है जो कि लगातार बढ़ रही है ।


courtesy : https://www.nasa.gov/mission_pages/station/spacewalks/


यदि किसी स्पेसशिप को पृथ्वी से छोड़ा जाए तो उसे "आई. एस.एस." (ISS) तक पहुंचने में लगभग छः घंटे लगेंगे । इसमें 350000 विभिन्न सेंसर्स लगे है जो इस स्टेशन और वहां रह रहे अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा और सेहत का ख्याल रखते है । अंतरिक्ष स्टेशन पर जापान के एच.टी.वी (HTV / H-II Transfer Vehicle ), रूस के प्रोग्रेस (The Progress), स्पेस एक्स (SpaceX)के ड्रैगन (Dragon) और नॉर्थरोप ग्रुम्मन (Northrop Grumman as part of NASA's Commercial Orbital Transportation Services) के सिग्नस (Cygnus) नामक कार्गो स्पेसक्राफ्ट (Cargo Spacecraft) की मदद से रसद, सप्लाई, उपकरण आदि उपलब्ध कराए जाते है ।



लखनऊ में दिनांक 9 अप्रैल और 10 अप्रैल 2020 को रात्रि आकाश में "आई. एस.एस." (ISS) चमकते हुए तेज़ी से गुजरता हुआ नजर आया । लखनऊ में 09 अप्रैल 2020 को शाम 08:06 पर "आई. एस.एस." (ISS) सिर्फ 2 मिनट के लिए पश्चिम दिशा से निकल कर दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर जाता हुआ दिखा । लखनऊ में 09 अप्रैल 2020 के रात्रि आकाश में "आई. एस.एस." (ISS) की महत्तम ऊंचाई क्षितिज से 16° थी ।



image courtasy : www.spotthestation.nasa.gov दिनांक 10 अप्रैल 2020 को लखनऊ के रात्रि आकाश में "आई. एस.एस." (ISS) पश्चिम तथा दक्षिण - पश्चिम दिशा के बीच में से शाम 7:29 को दिखाई देना शुरू हुआ । तथा अगले चार मिनट तक रात्रि आकाश में गमन करता हुआ नजर आया । जिसे लखनऊ वासियों ने खूब ध्यान से देखा और अपनी फ़ैमिली की भी दिखाया । लखनऊ में 10 अप्रैल 2020 के रात्रि आकाश में "आई. एस.एस." (ISS) की महत्तम ऊंचाई क्षितिज से 31° थी ।





लखनऊ में खगोल प्रेमी "आई. एस.एस." (ISS) का अगला अवलोकन दिनांक  22 अप्रैल 2020 को भोर में 04:52 पर तथा दिनांक 23 अप्रैल 2020 को भोर में 04:05 पर तीन - तीन मिनट के लिए कर सकेंगे ।  22 अप्रैल को  "आई. एस.एस." (ISS) दक्षिण तथा दक्षिण - पश्चिम के बीच से दिखाई देना शुरू होगा जो पूर्व तथा दक्षिण पूर्व दिशा के बीच में, की ओर जाते हुए विलुप्त हो जाएगा । इस दिन अप्रैल में सबसे ज्यादा ऊचाई 33° पर होगा । तथा 23 अप्रैल 2020 को दक्षिण तथा दक्षिण - पश्चिम के बीच में से दिखाई देना शुरू करेगा तथा ठीक 3 मिनट बाद पूर्व तथा दक्षिण - पूर्व दिशा के बीच में, की ओर जाते हुए विलुप्त हो जाएगा । इस दिन की महत्तम ऊंचाई क्षितिज से 16° रहेगी ।




Lucknowites in action mode for ISS Sighting on 9th and 10th April 2020



A Report by

Swapnil Rastogi,

President,

SKY Amateur Astronomers Club


Special Thanks to

1. Sumit Kumar Shrivastava, Scientific Officer, Indira Gandhi Planetarium, Lucknow

2. Dr. Sangharsh Rao, Scientist-D, Remote Sensing and Application Center, Lucknow.

3. Sri Amritanshu Vajpayee, Research Scholar, AGCA, TIFR, Mumbai.

4. Ms. Sweta Srivastava, Diretor, WLS, SKY Foundation.

5. Mr. Abhimanu, Outreach events coordinator, SKY Foundation.

6. Sri Vikram Pandey, Amateur Astronomer, UPAAC.

7. Sri Shubham Sharma, Amateur Astronomer, UPAAC.

8. Sri Yash Vyas, Amateur Astronomer, UPAAC.

9. Sri Hozaifa Shakeel, Amateur Astronomer, UPAAC.

10. Sri Arpan Gupta, Amateur Astronomer, UPAAC.


for their valuable inputs and photographs.


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